फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अक्षरम-2026 केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचारों का विराट उत्सव: जीजेयू कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई

गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित किए जा रहे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ अक्षरम-2026 के तीसरे दिन का शुभारंभ वंदे मातरम् तथा जीजेयू के कुलगीत के साथ हुआ। इस मौके पर जीजेयू कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि ‘अक्षरम-2026’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचारों का एक विराट उत्सव है। यह मंच विचारों की गंगा को प्रवाहित करने का कार्य कर रहा है, जहां देशभर से आए बुद्धिजीवी और विद्यार्थी एक साथ मिलकर संवाद कर रहे हैं। उन्होंने इसे युवाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन महानगरों की तर्ज पर अब विश्वविद्यालय स्तर पर भी नई पहचान बना रहे हैं। प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे नंद कुमार ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शब्दों की शक्ति अपार होती है, लेकिन जब शब्दों का गलत अर्थ लगाया जाता है तो वह समाज और राष्ट्र में विष घोलने का कार्य करता है। इसलिए साहित्य को सही दृष्टिकोण से समझना अत्यंत आवश्यक है। हितेश शंकर ने अपने संबोधन में कहा कि ‘अक्षरम्’ की परिकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। इस अवसर पर उन्होंने ‘अक्षरम्’ थीम की टी-शर्ट भी लॉन्च की और सभी अतिथियों को वितरित की। पत्रकार स्व. रोहित सरदाना के पिता रत्न चंद्र सरदाना को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस संसार में कोई ऐसा अक्षर नहीं जिससे श्लोक न बन सके और कोई ऐसी वनस्पति नहीं जिससे औषधि न बनाई जा सके। दीनबंधु छोटूराम के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति को समझने और उसे आत्मसात करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। सुपवा रोहतक के कुलपति प्रो. अमित आर्य ने कहा कि ‘अक्षरम’ जैसे भव्य आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करना अत्यंत सराहनीय है। सुपवा रोहतक के 150 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी कर इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। एचएयू कुलपति प्रो. बी.आर. कम्बोज ने कहा कि जीवन में संस्कार, साक्षरता और संस्कृति ये तीन ‘स’ अत्यंत आवश्यक हैं, जिनसे देश आत्मनिर्भर बन सकता है। कार्यक्रम की शुरुआत हरियाणवी लोक गायक बिंदर दनोदा और विनु गौड़ के भक्ति गीत “ओ नाथ जी चेला बना ले” ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। युवा यदि अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तो वह न केवल स्वयं सशक्त बनेगा, बल्कि राष्ट्र को भी सशक्त बनाएगा। माई सिटी रिपोर्टर हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित ‘अक्षरम-2026’ के दूसरे दिन सेमिनार हॉल नं. 3 में आयोजित दूसरे सत्र ने पूरे महोत्सव को एक नई वैचारिक ऊंचाई प्रदान की। सिरसा से पहुंचे संत रघुबीर सिंह बाजवा ने कहा कि युवा यदि अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तो वह न केवल स्वयं सशक्त बनेगा, बल्कि राष्ट्र को भी सशक्त बनाएगा। प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने इतिहास, राष्ट्रवाद और वैचारिक स्पष्टता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि “जिस समाज को अपने इतिहास और पहचान का बोध नहीं होता, वह दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता। प्रो. कोशलेंद्र तिवारी ने कहा कि “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को संवेदनशील, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाना है। मालिनी अवस्थी के रंगीला बैरन बिहारी” और “चुनरिया गुलाबी गीत पर झूमे दर्शक हिसार। ‘अक्षरम्-2026’ महोत्सव के अंतर्गत आज लोक संस्कृति, संगीत और सिनेमा पर केंद्रित एक विशेष विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी और प्रख्यात फिल्म निर्देशक व चिंतक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सिनेमा के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भगवान राम और अयोध्या के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपराएं हमारी पहचान की आधारशिला हैं। लोकगीतों और लोक परंपराओं से जुड़कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करें। मालिनी अवस्थी ने कहा कि हरियाणा के बच्चे अपनी मिट्टी से गहराई से जुड़े हुए हैं। लोक संगीत हमारी संस्कृति की आत्मा है, जिसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। मालिनी अवस्थी ने अपने मधुर स्वरों में “रंगीला बैरन बिहारी” और “चुनरिया गुलाबी” जैसे लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किए, जिन्हें सुनकर पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। फैशन परेड पर बजी तालियां... हिसार। तीन दिवसीय साहित्योत्सव ‘अक्षरम’ में दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स, रोहतक (डीएलसीसुपवा) के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मेन ऑडिटोरियम का मंच सुपवा के छात्र-छात्राओं के फैशन शो के दौरान रैंप ऑडिटोरियम में बदलता हुआ महसूस हुआ। छात्रों ने प्रोफेशनल मॉडल की भांति वॉक करते हुए पारंपरिक व आधुनिक भारतीय परिधान पेश किए। इस दौरान सभागार लगातार तालियां से गूंजता रहा। सुपवा के छात्र-छात्राओं को फैशन शो करने के लिए डेढ़ घंटे का समय अलॉट किया गया। इस दौरान रंग-बिरंगी रोशनी व अलग-अलग म्यूजिक की बीट्स पर सधे हुए कदमों के साथ छात्र-छात्राओं ने कैटवॉक की।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें