हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रणबीर गिल ने मुख्यमंत्री के नशा विरोधी अभियान का स्वागत करते हुए कहा कि नशे को जड़ से खत्म करना है तो सबसे पहले गली-गली में चल रहे अवैध शराब के खुर्दे बंद करने होंगे। रणबीर गिल ने कहा कि सोमवार को मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पंचायतों को संबोधित कर नशे के खिलाफ सहयोग मांगा था। पंचायतें सरकार के इस कदम के साथ हैं। "मुख्यमंत्री जी का यह निर्णय आने वाली पीढ़ी को बचाने वाला है। पंजाब के बाद अब हरियाणा का कोई गांव-शहर इस बीमारी से बचा नहीं है। 18-19 साल के बच्चे टीके लगाकर मर रहे हैं, घर खाली हो रहे हैं"। हर गांव में 10 अवैध कारोबारी रणबीर गिल ने दावा किया कि हरियाणा के करीब 7,000 गांवों में औसतन हर गांव में 10 लोग अवैध नशे का कारोबार करते हैं। शहरों की गली-गली में शराब के खुर्दे खुले हैं। कुल मिलाकर लगभग 2 लाख लोग अवैध कारोबार से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार मुनाफे के लिए गली-गली खुर्दे खुलवाते हैं। "इन खुर्दों का कोई लाइसेंस नहीं। शराब की आड़ में चिट्टा, स्मैक, इंजेक्शन और नशीली दवाएं बेची जाती हैं। नशेड़ी घर के बर्तन तक गिरवी रख देते हैं"। पंचायतों को सूची बनाने का अधिकार दें गिल ने सरकार से मांग की कि हर पंचायत और वार्ड के एमसी को लेटर भेजकर कहा जाए कि वे अपने क्षेत्र में नशे के कारोबारियों और अवैध खुर्दों की सूची बनाकर सरकार को दें। "ग्राउंड लेवल पर पंचायतों और एमसी को सबसे ज्यादा पता होता है कि नशा कहां बिक रहा है"। उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कहा कि पंचायतें शिकायत करती हैं, पर रेड के समय शराब न मिलने पर कार्रवाई नहीं होती। "सरकार ऐसा कानून बनाए कि चिन्हित कारोबारियों को नशा न मिलने पर भी 2-4 दिन हिरासत में रखा जाए, ताकि डर पैदा हो"। इसके लिए टोल फ्री नंबर जारी करने की मांग भी की। पंचायतों का ऐलान: जमानत नहीं कराएंगे रणबीर गिल ने बताया कि उनकी पंचायत बनने के बाद गांव में न ठेका चलने दिया, न अवैध खुर्दा। "हमने तय किया है कि नशा बेचने वाले या चोरी करने वाले की पंचायत जमानत नहीं कराएगी"। उन्होंने अन्य पंचायतों से भी अपील की कि समाज को बचाना है तो नशे के सौदागरों का साथ छोड़ना होगा। गिल के मुताबिक अगर अवैध खुर्दे बंद हो जाएं तो 70 फीसदी नशे पर काबू पाया जा सकता है। "जो लोग जहर परोसते हैं, चुनाव में शराब बांटकर गलत लोगों को वोट दिलवाते हैं, उनसे वोट का अधिकार छीन लेना चाहिए"।