टीबी का इलाज पूर्णतया: उपलब्ध है, बशर्ते इलाज को पूरा लिया जाए तथा दवाई के साथ खुराक का विशेष ध्यान रखा जाए। यह बात विश्व टीबी दिवस पर भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रघुबीर शांडिल्य ने बताते हुए कहा कि पूरी दुनिया में 25 प्रतिशत के लगभग टीबी के मरीज भारत में है। टीबी उन्मूलन को लेकर भारत तेजी से कार्य कर रहा है। 2030 तक वैश्विक स्तर पर टीबी को दुनिया से खत्म करने का लक्ष्य है। इसके चलते भारत सरकार ने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम भी चलाया हुआ है। इस वर्ष का टीबी को समाप्त करने का नारा, हां हम क्षय रोग को समाप्त कर सकते (यैस वी कैन एंड टीबी) है। 24 मार्च वर्ष 1882 में डा. राबर्ट कोच द्वारा टीबी के बैक्टीरिया की खोज की गई थी। इसके बाद से वैश्विक स्तर पर विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को मनाया जाता है। इस मौके पर भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रघुबीर शांडिल्य व टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की जिला प्रमुख डा. सुमन विश्वकर्मा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को 15 दिन से अधिक खांसी है, वजन कम हो रहा है, हल्का बुखार है, शाम के पसीना आता है, भूख कम लगती है, फेफड़ों में पानी भरता है या गांठे है तो यह टीबी हो सकता है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क टीबी की जांच होती है तथा टीबी की बीमारी पाए जाने पर 6 माह तक पूर्ण इलाज लेने के बाद यह बीमारी पूर्णतया: ठीक हो जाती है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर दवाई शुरू करते ही मरीज को आराम हो जाता है, परन्तु वे कोर्स पूरा नहीं करते। ऐसी स्थिति से मरीजों को बचना चाहिए। उन्हे पूरा कोर्स लेना चाहिए, तभी वे टीबी से मुक्त हो पाएंगे। उन्होंने बताया कि टीबी के मरीजों के लिए निक्षय मित्र भी है, जो मरीजों को पोषण किट उपलब्ध करवाते है। जिनमें प्रोटीन, फाईबर व अन्य पोषक तत्वों से भरपूर दाल व अनाज होती है। टीबी की दवाईयों के साथ मरीज को पर्याप्त पोषण भी जरूरी है। इसके लिए सरकार टीबी के मरीजों को एक हजार रूपये मासिक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाती है, ताकि मरीज पोषक भोजन ले सकें। उन्होंने बताया कि भिवानी जिला के 312 पंचायतों में से 153 पंचायतों को टीबी फ्री किया जा चुका है तथा शहर के 31 में से 12 वार्ड भी टीबी मुक्त हो चुके है। भिवानी जिला में टीबी मरीजों की जांच तोशाम, सिवानी, भिवानी, लोहारू व बवानीखेड़ा के सरकारी अस्पतालों में है तथा टीबी उन्मूलन को लेकर दवाईयां भी मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। इस मौके पर टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी से मुक्त हुए टीबी चैंपियन योद्धाओं ने स्वस्थ होने के बाद बताया कि टीबी कोई जानलेवा बीमारी नहीं है। बशर्ते उसका इलाज पूर्ण तौर पर अच्छी खुराक के साथ लेना चाहिए तथा आराम होने पर दवाई छोडऩे के बाद कोर्स को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे आज स्वस्थ है तथा अपने दिनचर्या के कार्य करते है।