बहुचर्चित मनीषा मौत मामला एक बार फिर आंदोलन में तबदील होने लगा है। इस बार वजह पुलिस की बजाए सीबीआई की जांच मानी जा रही है, जिसने करीब छह माह बाद भी मनीषा की मौत का कोई खुलासा नहीं किया है। गांव ढाणी लक्ष्मण से शुरू हुई पैदल न्याय यात्रा सोमवार दोपहर को लघु सचिवालय के बाहर पहुंची। जहां बड़ी संख्या में महिलाओं, किसान मजदूर संगठनों के अलावा खाप पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया वहीं विपक्षी दलों के नेता भी समर्थन देने पहुंचे। पैदल न्याय यात्रा की अगुवाई करने वाली सर्वमान्य न्याय संघर्ष समिति सदस्यों ने चेतावनी दी कि 24 मई तक यदि जनता के सामने सीबीआई की जांच के तथ्य नहीं रखे तो बड़ी महापंचायत कर फिर से आंदोलन किया जाएगा। गत 13 अगस्त से लापता मनीषा का 13 अगस्त को सिंघानी नहर के पास शव बरामद हुआ था। मनीषा मौत मामले की जांच तीन सितंबर से सीबीआई कर रही है। मनीषा मौत मामले में पैदल न्याय यात्रा का ज्ञापन लेने उपायुक्त धरना के बीच पहुंचे। लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।