हरियाणा की पहचान दूध दही के खाने से विश्व भर में बनी है, जिसकी बदौलत यहां के रणबांकुरे भारतीय सेना में भी अपने सौर्य के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन अब स्थिति उलट होने लगी है। प्रदेश में नशे का चलन बढ़ने लगा है। इसकी वजह से युवाओं की सेहत भी अब डावाडोल(सुस्त एवं कमजोर) होने लगी है। भिवानी के भीम स्टेडियम में अग्निवीर की भर्ती चल रही है। जिसमें चार जिलों के युवा भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, चरखी दादरी और रेवाड़ी के युवा शामिल हो रहे हैं। ये वो चार जिले हैं जिनसे देश की सीमाओं और सेना में अत्यधिक युवा देश सेवा कर रहे हैं। अग्निवीर की भर्ती के दौरान अधिकांश युवाओं का दम तो बिम लगाने में ही उखड़ने लगा है जबकि गड्ढा पार में भी अधिकांश युवा अयोग्य हो गए हैं। इसका एक मुख्य कारण हरियाणा की संस्कृति में बढ़ रहा हुक्के का चलन भी है, जिसका कश लगाने का ज्यादा क्रेज अब युवाओं में बढ़ रहा है। यही वजह है कि किसी का दौड़ में तो किसी का बिम लगाने में ही सेना भर्ती के दौरान दम उखड़ने लगा है। कई युवाओं का तो सेना भर्ती मापतोल के दौरान कद के मुकाबले उनका वजन भी बहुत कम आ रहा है। बुधवार को भीम स्टेडियम में अग्निवीर भर्ती के दौरान तीसरे दिन जरनल ड्यूटी के लिए भर्ती की गई थी। इसमें महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों के तहसील नांगल चौधरी, बावल,दाहिना, नाहर के अभ्यार्थियों ने भाग लिया। बुधवार को करीब 750 युवाओं को शामिल किया गया। इनमें से करीब 300 युवाओं को तो प्रथम चरण की प्रक्रिया में ही बाहर कर दिया गया। सेना के अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर युवा सेना के तय मापदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, इसकी वजह उनके खान-पान और दिनचर्या को माना जा सकता है। जिन युवाओं ने भर्ती के मानक पूरे किए हैं, उन्हें आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। संवाद