गुजरात के विधानसभा चुनावों के पहले चरण में होने वाले सौराष्ट्र क्षेत्र में इस बार कांग्रेस के लिए अपना किला बचाने को सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। दरअसल पाटीदार आंदोलन के चलते 2017 में सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस ने इसी क्षेत्र से जीती थीं। लेकिन इस बार पाटीदार आंदोलन के कई बड़े चेहरे कांग्रेस से अलग हो गए हैं। तो सवाल यह है क्या कांग्रेस इस बार सौराष्ट्र में अपना किला बचाने में सफल होगी। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के अलग होने और आम आदमी पार्टी के सक्रिय होने से भाजपा को ऑक्सीजन मिल गई है। फिलहाल सौराष्ट्र क्षेत्र में होने वाला चुनाव इस बार पिछले साल की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण होंगे।