सिंधी समाज के गुरू साईं रविदास ने बताया कि लगभग एक हजार साल पहले सिंध में मिरख शाह, सिंधी हिंदुओं पर अत्याचार कर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। संकट से मुक्ति के लिए सिंधी समाज ने सिंधु नदी के तट पर जाकर 40 दिनों का उपवास और आराधना की। इसी नदी से भविष्यवाणी हुई कि चैत्र प्रतिपदा की तिथि को एक बालक जन्म लेगा, जो इस राजा का अंत करेगा। और भविष्यवाणी के अनुसार बालक ने उसी तिथि पर जन्म लिया। वहां की सारी प्रजाओं ने देखा और जो 40 दिन का व्रत-पूजा पाठ सिंधु नदी पर सिंध के लोगों ने किया था उसी 40 दिन को हम महोत्सव के रुप में मनाते हैं। इन 40 दिनों तक भक्त जमीन पर सोते हैं, सात्विक (बिना प्याज-लहसुन के) भोजन करते हैं, नए कपड़े नहीं पहनते, बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते और सांसारिक सुखों का त्याग कर पूरी तरह भक्ति में लीन रहते हैं।