कहने को नूंह जिला मुख्यालय है, लेकिन सुविधाएं यहां पर गांवों के बराबर भी नहीं मिल पा रही है। जिसके लिए नगरपरिषद प्रशासन, जिला प्रशासन व सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। छोटे से शहर में इतनी समस्याएं है कि सुबह से शाम तक हर दुकानदार, ग्राहक, शहरवासी, ग्रामीण सब यहां आकर परेशान रहते है। ऐसे आरोप नूंह शहर की पुरानी अनाजमंड़ी में स्थित मेन बाजार के दुकानदारों ने संवाद के दौरान अपनी बात रखते हुए लगाए। शनिवार को संवाद कार्यक्रम में दुकानदार कृष्ण अग्रवाल, जितेंद्र कुमार, मोहित, हरीश जैन, लाला कपड़े वाला, चमनलाल, अनिल कुमार, नीरज गोयल, प्यारे लाल, ऋषभ गर्ग आदि ने कहा कि पुरानी अनाजमंडी में पहले किसानों के ट्रैक्टर, बैल-गाड़ियां, ट्रक खूब आते थे, लेकिन इस समय इसमें मोटरसाइकिल भी बड़ी मशक्कत से लेकर आई जाती है। लोगों ने अतिक्रमण करके इसमें आने वाले दोनों मुख्य रास्तों को इतना संकरा कर दिया है कि गाड़ी निकालने से पहले कई बार सोचना पड़ता है और यह अतिक्रमण हर रोज बढ़ता ही जा रहा है, जिसकी तरफ न तो नप प्रशासन का ध्यान है और न ही पुलिस कोई ध्यान देती है। वहीं बाजार में पुलिस की गश्त न होने के कारण लोगों की सुरक्षा राम भरोसे है। आए दिन बाजार से मोटरसाइकिलें व घरों से अन्य सामान चोरी हो रहे है। सफाई व्यवस्था एक बड़ी समस्या है। नगरपरिषद घर से कूड़ा उठाने का टैक्स लेती है, लेकिन आज तक भी घरों से कूड़ा उठाने कोई नहीं आया। मैं दो दिन पहले ही कूड़ा उठाने का 2160 रुपये टैक्स नगर परिषद में भरकर आया हूं। कूड़ा घरों से उठाना तो दूर, सफाईकर्मी भी ढंग से गलियों की सफाई नहीं करते।