नूंह में शांति यज्ञ का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया, जिसमें मंत्रोच्चार का दायित्व आचार्य राजेश शास्त्री ने निभाया। कार्यक्रम का संचालन वेद प्रचार मंडल मेवात के अध्यक्ष ज्ञानचंद आर्य ने किया। उन्होंने उपस्थित लोगों को अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश पंच क्लेशों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि अविद्या के कारण ही मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं पहचान पाता। उन्होंने वेदों को मुक्ति का मार्ग बताते हुए कहा कि वेद सबसे प्राचीन और भारतीय संस्कृति की आधारशिला हैं।