फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोए़डा में लोकगीत के माध्यम से सुनाई गई आल्हा ऊदल की वीरता की गाथा, मेरठ के विनोद कुमार ने दी प्रस्तुति

अनुज कुमार Updated Wed, 28 May 2025 02:39 PM IST

नोएडा के सेक्टर 62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में बुंदेली वीरता की अमर गाथा आल्हा-ऊदल को लोकगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम वीरता, परंपरा और लोकसंस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बना। पारंपरिक लोकगायक विनोद कुमार ने अपनी सशक्त प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को आल्हा-ऊदल की वीरता, शौर्य और बलिदान की गाथा से परिचित कराया। उनके द्वारा गाए गए लोकगीतों में रणभूमि की गूँज, मातृभूमि के प्रति निष्ठा, और धर्म के लिए जीवन न्यौछावर करने की भावना झलक रही थी। दरअसल आल्हा और ऊदल, बुंदेलखंड की धरती पर जन्मे ऐसे वीर योद्धा थे, जिन्होंने 12वीं शताब्दी में अपने अपराजेय पराक्रम से इतिहास के पन्नों में अमिट छाप छोड़ी। राजा परमाल के सेनापति के रूप में, उन्होंने कई लड़ाइयों में अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया। उनकी बहादुरी की गाथाएँ आज भी लोकगीतों के रूप में गाईं जाती हैं और ग्रामीण अंचलों में बड़े चाव से सुनी जाती हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र से आए बच्चों ने भाग लिया। यह आयोजन उनके लिए भारतीय लोकसंस्कृति और वीर परंपराओं से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बना। बच्चों ने न केवल आल्हा-ऊदल की गाथा को सुना, बल्कि भारतीय वीरता की जड़ों को भी समझा। इस अवसर पर भारतीय विरासत संस्थान की समकुलपति डॉ. मानवी सेठ समेत अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें