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ग्रेटर नोएडा में पुलिस की पाठशाला: छात्रों ने ACP से सीखे ट्रैफिक नियम, कोहरे में सावधानियों के तरीके बताए

अनुज कुमार Updated Wed, 17 Dec 2025 07:31 PM IST

ट्रैफिक सुरक्षा कानून का विषय भर नहीं, यह परिवार और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए वह न तो खुद नियम तोड़ेंगे और न किसी को सड़क पर लापरवाही की अनुमति देंगे। यह बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को सेक्टर-ओमेगा स्थित स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल में ‘पुलिस की पाठशाला’ कार्यक्रम में एसीपी ट्रैफिक राकेश प्रताप सिंह ने कही। उन्होंने छात्रों को ट्रैफिक नियम, सड़क सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में सड़क हादसों में होने वाली मौतों की बड़ी वजह ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, तेज रफ्तार, बिना हेलमेट व सीट बेल्ट ड्राइविंग है। यदि सिर्फ सीट बेल्ट और हेलमेट का पालन कर लिया जाए तो हर साल लाखों लोगों की जान बच सकती है। उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट सिर्फ चालक और आगे वाली सीट के लिए नहीं, पीछे बैठे हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। लाइसेंस नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र में दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाना कानूनन अपराध है। यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो उसके अभिभावक और वाहन मालिक दोनों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि ‘फैशन’ के नाम पर बिना लाइसेंस वाहन चलाना खुद के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि बिना हेलमेट, रेड लाइट जंप, गलत लेन में वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करना, स्टंट करना, तेज रफ्तार एवं ओवरलोडिंग ऐसे अपराध हैं जिन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होती है। यातायात पुलिस का मकसद किसी को डराना नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रदान करना है। कोहरे में दृश्यता कम होने पर डिपर पर लो बीम लाइट का इस्तेमाल करें। अचानक ब्रेक न लगाएं, वाहन के बीच दूरी रखें, ओवरटेक से बचें और निर्धारित स्पीड में चलें। एसीपी ने पुलिस की आपातकालीन सेवाओं और हेल्पलाइन नंबर डायल-112 (पुलिस आपातकालीन सेवा), 1090 (महिला सुरक्षा हेल्पलाइन), 1930 (साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन), 101 (फायर सर्विस) के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इन सभी नंबरों को हर नागरिक को याद रखना चाहिए। साइबर अपराध के मामलों में समय सबसे बड़ा हथियार है। किसी के साथ डिजिटल फ्रॉड होता है तो पहले 30 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, तत्परता से 1930 पर कॉल करके बैंकिंग रोकथाम प्रक्रिया शुरू कराई जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने सवाल पूछे क्या पुलिस बिना हेलमेट वाले को तुरंत जेल भेज सकती है ? क्या हाईवे पर 250 की स्पीड अपराध है ? क्या कोई गलत पार्किंग पर भी कार्रवाई होती है ? एसीपी ने हर सवाल का धैर्य और उदाहरण सहित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस दंड देने से ज्यादा नागरिकों में जागरूकता और अनुशासन बढ़ाने के लिए काम करती है। कहा कि यातायात व्यवस्था तभी सुधरेगी जब परिवार बच्चों के सामने सुरक्षित ड्राइविंग का उदाहरण पेश करेंगे। यदि माता-पिता हेलमेट न पहनकर बाइक पर बैठेंगे तो बच्चा कभी ट्रैफिक अनुशासन को गंभीरता से नहीं लेगा। कार्यक्रम में उपस्थित स्कूल की प्रधानाचार्य ज्योति राणा ने बताया कि बच्चों के साथ सीधे संवाद की यह पहल न सिर्फ शिक्षा का हिस्सा है बल्कि जीवन रक्षा का पाठ है। उन्होंने आशा जताई कि विद्यार्थी सीख को व्यवहार में अपनाएंगे। इस मौके स्कूल की समन्वयक स्वाति कर्णवाल, लक्ष्मी सिंह और अंकित शर्मा भी मौजूद रहे।

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