नोएडा सेक्टर-53 स्थित कंचनजंगा मार्केट जो कभी नोएडा के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक था, आज कई अतिक्रमण, असुरक्षा और प्राधिकरण के बेरूखी के जाल में उलझा हुआ है। 1997 में 55 दुकानों के साथ अस्तित्व में आए इस बाजार की शुरुआत महज चार व्यापारियों ने की थी। उस समय यह बाजार अपनी सादगी और सुविधाओं के लिए जाना जाता था। बीते 27 साल बाद आज यह अतिक्रमण, जाम, पानी की किल्लत, सीवर की समस्या और बुनियादी ढांचे की बदहाली का शिकार हो चुका है। स्थानीय व्यापारियों और ग्राहकों का कहना है कि प्राधिकरण की उदासीनता के कारण यह बाजार अपनी चमक खो चुका है। ये बातें कंचनजंगा मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारियों व व्यापारी ने अमर उजाला मार्केट संवाद कार्यक्रम के दौरान कही। कंचनजंगा मार्केट की सबसे बड़ी समस्या पानी की किल्लत है। यहां के व्यापारी संदीप सिंह, सुभाष, रामराज कुशवाहा, पंकज, राहुल चौहान आदि ने कहा कि पानी का बिल नियमित रूप से चुकाने के बावजूद कई दुकानों में पानी का कनेक्शन नहीं मिला है। जो कनेक्शन उपलब्ध हैं, उनमें भी पानी की सप्लाई अनियमित और अपर्याप्त है। नल सूखे रहते हैं। मजबूरी में हमें टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। इसके अलावा सीवर, सुरक्षा, अतिक्रमण, जाम और मार्केट के बाहर प्राधिकरण द्वारा मुख्य सड़क पर बनाया गया वेंडर जोन व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। वेंडर जोन ने कंचनजंगा बाजार की स्थिति को और खराब कर दिया है।