स्ट्रोक के मरीजों की जल्द पहचान हो सके और उन्हें गोल्डन ऑवर्स के भीतर उपचार मिल सके, ताकि क्षति कम हो। इसी उद्देश्य से बृहस्पतिवार को हेल्पलाइन आशा लॉन्च की गई है। हेल्पलाइन 6230 93 6230 पर फोन करके मरीज के लक्षण बताकर स्ट्रोक तो नहीं इसके बारे में पूछ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के बाद शुरुआती 60 मिनट में हस्तक्षेप से मृत्यु और स्थायी विकलांगता का खतरा काफी कम हो जाता है। फोर्टिस डॉ राहुल गुप्ता ने बताया कि भारत में हर साल 15–18 लाख नए स्ट्रोक मामले सामने आते हैं। हेल्पलाइन आशा मरीजों को गोल्डन विंडो में सही उपचार तक पहुंचाएगी। डॉ ज्योति बाला ने बताया कि यह हेल्पलाइन स्ट्रोक के उन लक्षणों को पहचानने में मदद करती है जो वैश्विक स्तर पर स्वीकृत हैं। यानी बी-फास्ट, यानी संतुलन की समस्या, दृष्टि समस्या, चेहरा लटकना, बाजू या हाथ- पैर में कमजोरी, जुबान लड़खड़ाना या बोलने में परेशानी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुरुआती 60 मिनट में मिला उपचार परिणामों को कई गुना बेहतर करता है। डॉ. नेहा पंडिता ने बताया कि भारत दुनिया में स्ट्रोक के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में शामिल है, जो हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, तनाव और खराब दिनचर्या जैसी वजहों से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली में बदलाव और जागरूकता से 80 प्रतिशत स्ट्रोक रोके जा सकते हैं।