उद्यमियों का कहना है कि प्राधिकरण ने बिना किसी प्लान के सेक्टर को 20 वर्ष पहले बसा तो दिया लेकिन यहां पर आज तक पानी सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है जिसके चलते यहां के लोगों को आज भी बोरवेल के पानी के सहारे रहना पड़ रहा है। उद्यमियों का आरोप है कई बार प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत की गई है लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। साथ ही यहां पर चारों तरफ फैली रहने वाली गंदगी से बीमारियां पनप रही हैं। लेकिन जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर इकोटेक-2 स्थित उद्योग विहार एक्सटेंशन में आयोजित अमर उजाला उद्यमी संवाद में उद्यमियों ने रोजाना होने वाली समस्याओं को बताया। उद्यमियों ने कहा कि सेक्टर में बंदरों का आतंक दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बंदर लगातार कर्मचारियों पर हमला कर घायल कर देते हैं। कई बार समस्या के संबंध में प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण समस्या बनी हुई है। उद्यमियों ने आरोप लगाया कि सेक्टर में नशेबाजी होने के कारण अपराध की घटनाएं होती रहती हैं। कई बार स्थानीय प्रशासन मामले की शिकायत की गई। इसके अलावा यहां पुलिस की पेट्रोलिंग बढ़ाए जाने की मांग की गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनी हुई हैं। इसके अलावा निवेश मित्रा में सभी कागज अपलोड होने के बाद भी अलग-अलग साइटों पर भी कागज अपलोड करने पड़ते हैं। उद्यमियों का आरोप है कि जीएसटी बिल को ऑनलाइन जमा करने के बाद भी जीएसटी विभाग के अधिकारी कार्यालय बुलाकर परेशान करते हैं। उद्यमियों ने कहा कि सरकार हमसे टैक्स और जीएसटी तो ले रही है, लेकिन हमें स्वास्थ्य के नाम पर कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा के उद्यमियों या कर्मचारियों को ईएसआईसी अस्पताल में उपचार की सुविधा लेनी हो तो उन्हें नोएडा जाना पड़ता है। इससे समय के साथ ही रुपयों की बर्बादी होती है और ड्यूटी करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रेटर नोएडा में ईएसआईसी अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उद्यमियों का आरोप है कि सेक्टर में सफाई व्यवस्था बिल्कुल चरमा गई है। महीने में एक या दो बार ही झाड़ू लगती है। जिस कारण सेक्टर में फैली गंदगी से बीमारियां पनपने का डर सताया करता है। इसके अलावा जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में सड़कें जलमग्न हो जाती हैं।