ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने करोड़ों रुपये खर्च कर शहर के अलग-अलग स्थानों पर नौ सुलभ शौचालय बनवाए थे, जो कि विभाग की उदासीनता के चलते ही जर्जर हो रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में विभाग की हकीकत सामने आई है। बीते 17 अक्तूबर को विभाग के अधिकारी की तरफ से बताया गया था कि 15 से 20 दिन के अंदर टेंडर हासिल करने की वाली एजेंसी को शौचालय के रखरखाव का संचालन सौंप दिया जाएगा, लेकिन शुक्रवार को जब बात की गई तो उन्हें टेंडर प्रकिया की जानकारी ही नहीं थी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से 2020 में शहर के रामपुर, ऐच्छर, बिरौंडा, तुगलपुर, नये की मढेया, घरवरा, मुरशादपुर, रिठोरी और मांयचा में 1.61 करोड़ रुपये धनराशि लगाकर तैयार किया गया था। इनके संचालन के लिए टेंडर प्रकिया भी की गई थी। उस दौरान कुछ स्थानों पर तो शौचालयों का संचालन करने के लिए ठेका लिए गये कंपनी की तरफ से रीडर पहुंचे थे, तो कुछ में पहुंचे ही नहीं थे। जिसके बाद से धीरे-धीरे करके सभी 09 शौचालय बंद हो गए। बीते 02 से 03 वर्षों से सभी शौचालय बंद पड़े हैं। जिसके चलते जर्जर हालत में भी पहुंच गए हैं। शौचालयों के संचालन न होने के कारण राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत भी की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।