शहर के कलेक्ट्रेट भवन से करीब एक किलोमीटर दूर नारंगी पुलिया पार कर गिरोला पहुंच मार्ग पर राख डंप करने का मामला सामने आया है। माजीसा कोल्ड स्टोरेज के पास नदी तट पर बड़ी मात्रा में राख या राखड़ खुले में फेंका गया है। इससे गिरोला और आसपास के गांवों के लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
सड़क किनारे उड़ती राख राहगीरों, किसानों और वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गई है। किसान अनिल मरकाम ने बताया कि यह राख कलेक्ट्रेट के सामने संचालित माजीसा राइस मिल से निकली है। मिल संचालक ने इसे यहां लाकर फेंक दिया है। तेज हवा चलने पर राख सड़क पर उड़ती है और लोगों के कपड़ों, शरीर और आंखों में चली जाती है।
कई लोगों को आंखों में जलन और संक्रमण के कारण मेडिकल उपचार कराना पड़ा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन को समस्या की जानकारी है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। जिले में कई राइस मिल संचालक राखड़ को खुले में कहीं भी डंप कर देते हैं। यह जिलेभर में फैली पर्यावरणीय लापरवाही का उदाहरण है।
पर्यावरणीय नियमों के अनुसार, राइस मिलों से निकलने वाली राख का खुले में भंडारण प्रतिबंधित है। मिल संचालकों को राख को बंद क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से संग्रहित करना होता है। इससे धूल और प्रदूषण वातावरण में नहीं फैलता। मिलों में डस्ट कलेक्टर और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाना भी अनिवार्य है। राख का औद्योगिक उपयोग, जैसे ईंट निर्माण या सीमेंट उद्योग में, बेहतर विकल्प माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासन को संयुक्त निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। पहले चरण में निरीक्षण और नमूना जांच आवश्यक है। दूसरे चरण में नोटिस और सुधार की समयसीमा तय की जाए। नियमों का पालन नहीं होने पर मिल को सील करने, जुर्माना लगाने और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए।