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महंगाई के चलते आरबीआई ने बढ़ाई रेपो दर, दिसंबर में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

Thu, 22 Oct 2026 02:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

महंगाई का दायरा बढ़ने और कई वस्तुओं की कीमतों पर दबाव तेज होने के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का सर्वसम्मति से समर्थन किया। बुधवार को जारी बैठक के ब्योरे में यह जानकारी सामने आई। इस फैसले को देश की मौद्रिक नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि करीब चार साल बाद पहली बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया। आरबीआई का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब महंगाई को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना नीति निर्माताओं के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के दौरान कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव करना और धीरे-धीरे सख्ती की दिशा में आगे बढ़ना उचित है। उनके अनुसार, महंगाई से जुड़े जोखिमों और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। मौद्रिक नीति में सख्ती का उद्देश्य कीमतों पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखना होता है। रेपो दर में बदलाव का असर बैंकों की उधार लेने की लागत पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर भी दिखाई दे सकता है।

आरबीआई ने सात अक्टूबर को संपन्न हुई तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में समिति के सभी छह सदस्यों ने मतदान किया। इनमें आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी शामिल थे। सभी सदस्यों की सहमति इस बात को दर्शाती है कि समिति ने मौजूदा परिस्थितियों में महंगाई के जोखिमों को गंभीरता से लेते हुए नीतिगत दर बढ़ाने का निर्णय किया।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह भी संकेत दिया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद करना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई के रुझान और समग्र आर्थिक परिदृश्य के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर रेपो दर में और बढ़ोतरी की जा सकती है या इसे मौजूदा स्तर पर बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, भविष्य में दरों को लेकर अंतिम निर्णय परिस्थितियों और उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

रेपो दर में बढ़ोतरी का असर आम लोगों, कारोबारियों और कर्ज लेने वालों पर पड़ सकता है। यदि बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ईएमआई महंगी हो सकती है। वहीं, जमा पर मिलने वाली ब्याज दरों में भी बदलाव संभव है। कुल मिलाकर, आरबीआई का यह फैसला महंगाई पर नियंत्रण रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े और आर्थिक गतिविधियां यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखता है या उनमें आगे कोई बदलाव करता है।

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