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सोने-चांदी की कीमत: सस्ता हुआ सोना! कितनी हुई 10 ग्राम सोने की कीमत?

Wed, 26 Aug 2026 09:55 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

चार दिन की लगातार तेजी के बाद सोने की कीमतों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोना 600 रुपये सस्ता होकर 1 लाख 66 हजार 500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 1 लाख 67 हजार 100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। यानी बुधवार को इसमें करीब 600 रुपये की गिरावट देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में यह नरमी मुख्य रूप से मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुझानों की वजह से आई है। लगातार चार दिनों की तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक किया, जिसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दिखाई दिया।

मुड्रेक्स के लीड क्वांट विश्लेषक अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर में मजबूती ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है। निवेशक अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी PCE मुद्रास्फीति रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं और इसका सीधा असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने जैसी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर पड़ सकता है।

हालांकि, सोने में गिरावट के बावजूद चांदी की कीमत में तेजी आई है। चांदी 500 रुपये बढ़कर 2 लाख 50 हजार 500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। मंगलवार को चांदी 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, ये कीमतें सभी करों सहित हैं।

अब अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां भी सोने में नरमी देखने को मिली। हाजिर सोना करीब 39.66 डॉलर यानी लगभग 1 फीसदी गिरकर 4,619.21 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इससे पहले लगातार पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई थी।

मीराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह के मुताबिक, हाजिर सोना करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 4,621 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी मामूली गिरावट के साथ 68.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कई वैश्विक कारक इस समय बाजार में मौजूद हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, सोने को सपोर्ट देने वाले कुछ कारक भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी के बढ़ते ऋण-पुनर्खरीद कार्यक्रम, कम बॉन्ड प्रतिफल और चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण सोने को इस साल मजबूत समर्थन मिला है। इसके अलावा, पिछले कुछ हफ्तों में गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF में भी होल्डिंग बढ़ी है।

कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी का असर बाजार के व्यापक सेंटीमेंट पर पड़ा है। प्रवीण सिंह के मुताबिक, ईरान और ओमान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से खोलने के प्रयासों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही।

अब सवाल है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमत किस दिशा में जाएगी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट-कमोडिटीज सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति को लेकर रुख बेहद अहम रहेगा। फेड के फैसलों का असर डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा, जिसका सीधा असर सोने और दूसरी कीमती धातुओं पर भी हो सकता है।

निवेशकों की नजर अब शुक्रवार को होने वाले जैक्सन हॉल संगोष्ठी पर भी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण से बाजार को आगे की मौद्रिक नीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।

यानी फिलहाल घरेलू बाजार में सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कई ऐसे फैक्टर मौजूद हैं जो इसकी कीमतों को दोबारा ऊपर ले जा सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में डॉलर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेड की नीति सोने की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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