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रुड़की में जिले का क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड कार्यालय, पर नहीं होती हवा की जांच

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कहने को तो रुड़की में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय है। यहीं से जिलेभर की औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषण की जांच और अनुमति समेत जल गुणवत्ता की जांच होती है, लेकिन अभी तक शहर में वायु प्रदूषण का स्तर जांचने के लिए यंत्र नहीं लगाए जा सके हैं। हाल फिलहाल में वायु प्रदूषण की जांच शुरू करने की कोई योजना भी नहीं है जबकि आबोहवा दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
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रुड़की स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से हरिद्वार के सिडकुल और भगवानपुर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित फैक्टरियों को संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। समय-समय पर कार्यालय के अधिकारी फैक्टरियों की जांच भी करते हैं। वायु प्रदूषण की रोकथाम और जागरूकता पैदा करने की बड़ी जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर है। लेकिन, जब देशभर में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आ रहा है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्कूल व सरकारी दफ्तर बंद करने की नौबत आ गई है तो इस गंभीर मसले को लेकर रुड़की में चिराग तले अंधेरा वाली स्थिति है। क्षेत्रीय कार्यालय होने के बावजूद यहां वायु प्रदूषण जांच की कोई सुविधा नहीं है।
लॉकडाउन से पहले दीपावली के त्योहार पर ध्वनि प्रदूषण की जांच की जाती थी, लेकिन इस बार यह भी नहीं हो पाई। क्षेत्रीय अधिकारी सुभाष पंवार का कहना है कि हाल ही में रुड़की स्थित लैब में जल गुणवत्ता जांच शुरू की गई है। इसमें गंगा के दस प्वाइंट पर हर महीने सैंपल की जांच की जा रही है। इसके अलावा एसटीपी और गंगा में गिर रहे नालों के पानी की जांच हो रही है। फिलहाल रुड़की में प्रदूषण जांच शुरू करने की योजना नहीं है। अभी मुख्य फोकस हरिद्वार शहर पर है। बोर्ड मुख्यालय से दिशा-निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदूषण फैला रहे 100 से अधिक ईंट भट्ठों को नोटिस
लंढौरा और इसके आसपास स्थापित 100 से अधिक ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का कारण बनता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भट्ठा संचालकों को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) रुड़की की हाइड्रा तकनीक से चिमनियों से निकलने वाले प्रदूषण की रोकथाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तकनीक को अमल में लाने के बाद बोर्ड अनुमति जारी करता है। वहीं, एक याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में मामला उठाए जाने के बाद हाल ही में प्रदूषण बोर्ड ने 100 से अधिक ईंट भट्ठों को नोटिस जारी किए हैं।
लंढौरा में 100 से अधिक ईंट भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं का मामला समय-समय पर उठता रहा है। कुछ साल पहले सीबीआरआई की ओर से हाइड्रा तकनीक आधारित चिमनियां तैयार की गई थीं। इसके बाद से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी भट्ठा संचालकों को इन चिमनियों को लगाने के बाद ही संचालन के निर्देश दे रखे हैं। वहीं, इस मामले हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले बैंक कॉलोनी रुड़की निवासी डॉ. राज अवतार सिंह ने 12 नवंबर को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर बताया है कि सीबीआरआई की तकनीक के इस्तेमाल को लेकर बोर्ड की ओर से भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन अब भी अधिकांश भट्ठे पुरानी तकनीक से संचालित हो रहे हैं। इससे जिलेभर में हवा जहरीली हो रही है। उन्होंने ऐसे भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना वसूले जाने की मांग की है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सुभाष पंवार ने बताया कि करीब 150 भट्ठा संचालकों को एक माह पूर्व नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से कुछ ऐसे हैं, जो नियमों का पालन कर रहे हैं। जल्द ही सभी भट्ठों की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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