बृहस्पतिवार को मुस्लिम समाज के लोग ईद मिलादुन्नबी की इबादत करते हुए मना रहे थे। वहीं, कुछ इंसानियत और आपसी सौहार्द के रहनुमा गणपति का विसर्जन कराने में मशगूल थे। फर्क बस इतना था कि कुछ लोग अपने धर्मस्थल में खुदा की इबादत कर रहे थे। वहीं, यह इंसानियत के फरिश्ते इसीलिए विसर्जन करा रहे थे कि कहीं गंगनहर के तेज बहाव के साथ पानी में कोई अप्रिय घटना ना घट जाए।
गोताखोर सुक्खा, फुरकान, इलियास का कहना है कि वह सभी धर्मों के भगवान का सम्मान करते हैं। ईद, होली, दिवाली के त्योहार में एक-दूसरे से गले मिलते हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग भाईचारे को बिगाड़ने में लगे रहते हैं। जबकि आज तक उन्हें किसी धर्म में कोई कमी नहीं दिखी। बस लोग अपने फायदे के लिए भड़काने का काम करते हैं।
500 लोगों की बचा चुके जान
सुक्खा के मुताबिक, वह तीनों 11 सालों में करीब 500 लोगों की जान बचा चुके हैं। वहीं, गंगनहर में डूबे लोगों की तलाश करने में भी मदद करते हैं। काफी संख्या में डूबे लोगों के शव भी उन्होंने गंगनहर से बरामद किए हैं। वह बताते हैं कि 2014 में एक कार गंगनहर में गिर गई थी, जिसमें सात लोग सवार थे, जिनमें से पांच लोगों को उन्होंने बचा लिया था। जबकि दो की मौत हो गई थी। हर साल सरधना गंगनहर से रोहटा तक होने वाले हादसों में लोगों की जान बचाने के लिए यह लोग खुद की परवाह न करते हुए जान बचाने में मददगार साबित होते हैं।
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