मान्यता है कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग स्थित नारद कुंड के आसपास नारदजी भ्रमण किया करते थे
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पातालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन करते हैं पूजा
यहां मान्यता है कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग स्थित नारद कुंड के आसपास नारदजी भ्रमण किया करते थे। इसकी महत्ता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कुंड का सौंदर्यीकरण करवाकर इसे भव्य रूप दिया है। गांव निवासी हुकम सिंह ने बताया कि वह प्रतिदिन नारद कुंड के समीप स्थित पातालेश्वर मंदिर में पूजा के लिए आते हैं।
स्वप्न में बोले थे जलकुंभी में फंसा हुआ हूं
लोग करने लगे जय जयकार
इस ग्रामीणों ने उस जगह पर तलाशी करने की योजना बनाई। इसके बाद स्वप्न के आधार नारद कुंड में जलकुंभी के आसपास लोग कूद पड़े और तलाश करनी शुरू कर दी। कुछ देर बाद जलकुंभी के बीच फंसी एक मूर्ति ग्रामीणों के हाथ लगी। उन लोगों ने उसे बाहर निकाला। मूर्ति नारद जी की ही थी। इसके बाद लोग नारद जी की जय जयकार करने लगे। थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने मूर्ति मिलने की जानकारी से इनकार किया है।