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आधुनिक रेल कोच कारखाने की डिजाइन फाइनल, जल्द शुरू होगा काम

झांसी ब्यूरो Updated Thu, 02 Jul 2020 01:06 AM IST
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work begin soon in rail coach factory

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झांसी। नगरा हाट के मैदान के पास कंडम कोच से आधुनिक कोच बनाने के लिए नई फैक्ट्री (रिफर्बिशमेंट) स्थापित होने जा रही है। सर्वे होने के बाद ही अब जल्द काम शुरू होगा। नई फैक्ट्री की डिजाइन फाइनल हो चुकी है। फैक्ट्री में लिंक हॉफमेन बुश कोच बनाने काम अब जल्दी शुरू होगा।
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रेल मंत्रालय ने झांसी स्टेशन के पास रिफर्बिशमेंट रेल कोच कारखाना लगाने को मंजूरी दी थी। रेलवे विकास निगम लिमिटेड को फैक्ट्री बनाने का काम सौंपा गया है। इस पुनर्निर्माण कोच कारखाने में कंडम खड़े सैकड़ों रेल डिब्बों को आधुनिक (एलएचबी) कोच के रूप में तब्दील किया जाएगा। इसके बाद एनसीआर में डिब्बों की कमी से नई ट्रेन चलाने की आ रही तकनीकी दिक्कतों की समस्या खत्म ही होगी। साथ ही, दूसरे जोनों में भी इस तरह के आधुनिक कोच भेजे जाएंगे। इसके निर्माण पर 456 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। फैक्ट्री की डिजाइन फाइनल हो चुकी है। जल्द ही अब इस पर काम शुरू होगा। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने आरवीएनएल को फैक्ट्री बनाने का काम सौंपा है। सर्वे पूरा होने के बाद अब डिजाइन भी फाइनल हो चुकी है।
प्रेमनगर वालों के लिए रहेगा तीस फीट का रास्ता
प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए तीस फीट का रास्ता भी निकाला जाएगा, जो काठ के पुल के पास खुलेगा। हाट के मैदान में कोच फैक्ट्री बनने पर प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए बगल से निकले रास्ते को तीस फीट का किया जाएगा, जो काठ के पुल के पास खुलेगा। यह रास्ता हाट के मैदान से खाती बाबा की तरफ जाने वाले रास्ते के बीच नीम माता मंदिर के पास से होकर जाएगा। इस रास्ते से प्रेमनगर के लोग खातीबाबा और पश्चिमी रेलवे बुकिंग कार्यालय की तरफ जा सकेंगे।
160 क्वार्टर तोड़े जा रहे
80 एकड़ जमीन के दायरे में 160 क्वार्टर आ रहे हैं, जिनको तोड़ने का काम काम भी चल रहा है। इन क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारियों को पश्चिमी रेलवे कालोनी के खाली पड़े क्वार्टरों में शिफ्ट किया जाएगा।
कच्चे माल की खपत न के बराबर
रेलवे अफसरों के मुताबिक कंडम कोच एक तरह से रेलवे के लिए कबाड़ है। इन कोचों को कारखाने में ले जाकर नया किया जाएगा तो नए डिब्बों में लगने वाले कच्चे माल की जरूरत न के बराबर होगी। इसकी वजह से कोचों के लागत मूल्य में भी कमी आएगी। अभी नया कोच तैयार करने में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत आती है।
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