मंगलवार का दिन भगवान प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी की उपासना को समर्पित है। कलयुग में हनुमानजी ऐसे साक्षात और जाग्रत देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं। हनुमान जी की उपासना से सुख, शांति, आरोग्य और लाभ की प्राप्ति होती है। नकारात्मक शक्तियां भी हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करती। शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी शिवजी के ग्याहरवें अवतार हैं जो धरती पर आज भी भ्रमण करते हैं।
कथा
मान्यता है कि हनुमान जी को अमर रहने का वरदान प्राप्त है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हनुमान अपने बाल अवस्था में थे तो उन्होंने सूर्यदेव को फल समझ लिया था। इसके बाद वह वायु की गति से सूर्य भगवान को खाने के लिए बढ़े। ये देखकर सभी देवता घबरा गए और इंद्र के पास गए। इंद्रदेव ने हनुमान जी को रोकने के लिए उनके मुख पर अपने वज्र से प्रहार किया, जिसके बाद हनुमानजी बेहोश होकर धरती पर गिर पड़े। ऐसे में जब पवन देव को हनुमान जी पर वज्र के प्रहार की बात पता चली तो उन्होंने समस्त संसार की वायु रोक दी। वायु रुकने से पूरे संसार में हाहाकार मच गया। यह देखकर ब्रह्मा जी सहित सभी देवता हनुमान के पास पहुंचे और उनको होश में लाए एवं पवन देव ने संसार में दोबारा से वायु का संचार शुरू कर दिया। हनुमान जी के होश में आने के बाद सभी देवताओं ने उन्हें अपनी शक्तियां प्रदान कीं।
सूर्यदेव से मिला तेज
मान्यता है कि सूर्यदेव से हनुमान जी को तेज प्राप्त है। सूर्य देव ने उन्हें अपने तेज का सौवां अंश दिया है इसी कारण हनुमान जी के सामने कोई नहीं टिक पाता।
यम से भी मिला है वरदान
धर्मराज यमराज से भी हनुमान जी को वरदान मिला हुआ है, उन्हें कभी भी यमराज का शिकार नहीं होने का वरदान प्राप्त है।
कुबेर से मिली गदा
हनुमान जी हमेशा अपने हाथ में गदा लिए रहते है और इसी गदा से उन्होंने बड़े-बड़े असुरों का वध किया। बजरंगबली को ये गदा कुबेर देव मिली थी और साथ में ये भी आशीर्वाद दिया कि हनुमान को कभी भी किसी युद्ध में परास्त नहीं किया जा सकता है।
भगवान शंकर से मिला वरदान
भोलेनाथ से हनुमान जी को वरदान मिला है कि हनुमान जी को किसी भी अस्त्र से नहीं मारा जा सकता।
इंद्रदेव से मिला ये वरदान
शास्त्रों के अनुसार इंद्र और हनुमान जी के बीच हुए युद्ध में इंद्र ने हनुमान जी को यह वरदान दिया था कि भविष्य में कभी उनके वज्र का असर बजरंगबली पर नहीं होगा।
विश्वकर्मा से मिला वरदान
भगवान विश्वकर्मा ने जितने भी शस्त्र बनाए हैं किसी का भी असर बजरंगबली पर नहीं होगा, ये वरदान उन्हें विश्वकर्मा से प्राप्त है।
वरुण देव से विशेष वरदान
वरुण देव से हनुमान जी को ये वरदान मिला है कि 10 लाख वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी जल से हनुमान जी की मृत्यु नहीं हो सकती।
ब्रह्मा से मिला वरदान
दीर्घायु का वरदान बजरंगबली को ब्रह्मा से मिला है, हनुमान जी अपनी इच्छा अनुसार कोई भी रूप धारण करके कहीं भी जा सकते हैं।