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Kharmas 2023: खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य, जानिए खरमास के नियम और पौराणिक कथा

Tue, 12 Dec 2023 09:53 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

खरमास में सूर्य की गति धीमी हो जाती है जिस कारण कोई भी शुभ कार्य में सफलता मिलने की संभवानाएं कम हो जाती है।  
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Kharmas 2023: खरमास की अवधि में विवाह,मुंडन संस्कार,यज्ञोपवीत,गृहप्रवेश या नीवं का मुहूर्त आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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विस्तार
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Kharmas 2023: खरमास इस साल 16 दिसंबर, शनिवार से शुरू होने जा रहा है और 15 जनवरी, 2024 को समाप्त होगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश,नींव का मुहूर्त जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। खरमास में सूर्य की गति धीमी हो जाती है जिस कारण कोई भी शुभ कार्य में सफलता मिलने की संभवानाएं कम हो जाती है।  

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खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?
शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब बृहस्पति की राशि धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो इस दौरान वह अपने गुरु की सेवा में रहते हैं। ऐसे में सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है। साथ ही सूर्य की वजह से गुरु ग्रह का बल भी कमजोर होता है। शुभ कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न होने के लिए इन दोनों ग्रहों का मजबूत होना जरूरी है। यही वजह है कि इस दौराण मांगलिक कार्य फलित नहीं होते इसलिए इसे अशुभ मास माना गया है।

खरमास के नियम
धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास के महीने में पूजा-पाठ,तीर्थ यात्रा, मंत्र जाप, भागवत गीता, रामायण पाठ और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना गया है। खरमास के दौरान दान, पुण्य, जप, और भगवान का ध्यान लगाने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इस महीने में सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत फलदाई है।
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कथा
पुराणों के अनुसार जब एक बार सूर्य देवता अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्राह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे।तब निरंतर चलते रहने के कारण उनके रथ में जुते घोड़े बहुत थक गए और सभी घोड़े प्यास से व्याकुल हो रहे थे।घोड़ों की यह स्थिति देखकर सूर्य देव बहुत दुखी हुए और  उनकी चिंता होने लगी।रास्ते में उन्हें एक तालाब दिखाई दिया जिसके पास दो खर यानी गधे खड़े थे। भगवान सूर्यनारायण ने प्यास से व्याकुल अपने घोड़ों को राहत देने के लिए उन्हें खोल कर दो गधों को अपने रथ में बाँध लिया।लेकिन खरों के चलने की गति धीमी होने के कारण रथ की गति भी धीमी हो गई। फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा हो गया। उधर तब तक घोड़ों को काफी आराम मिल चुका था। इस तरह यह क्रम चलता रहता है। इसी वजह से इस महीने का नाम खर मास रखा गया। इस प्रकार पूरे पौष मास में खर अपनी धीमी गति से भ्रमण करते हैं और इस माह में सूर्य की तीव्रता बहुत कमजोर हो जाती है, पौष के पूरे महीने में पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य का प्रभाव कमजोर हो जाता है।चूंकि सनातन धर्म में सूर्य को महत्वपूर्ण कारक ग्रह माना जाता है, ऐसे में सूर्य की कमजोर स्थिति को अशुभ माना जाता है इस कारण खरमास में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लगा दी जाती है।

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