आज पौष पूर्णिमा है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा या शाकम्भरी पूर्णिमा भी कहते हैं। सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि, जगत के पालनहार, भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसे में इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, स्न्नान, दान-पुण्य और व्रत करने का विधान है। हिंदू पंचांग के के अनुसार 24 जनवरी की रात 9 बजकर 24 मिनट से पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शुरू हो गई है। जिसका 25 जनवरी को रात 11 बजकर 23 मिनट पर समापन होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार 25 जनवरी को पौष पूर्णिमा मनाई जा रही है। पौष पूर्णिमा के दिन कुछ उपायों को करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
तीर्थों के जल में स्न्नान
इस दिन गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। इस दिन से ही माघ स्न्नान शुरू हो जाता है।मान्यता है कि इस दिन किसी पवित्र नदी में स्न्नान करने से प्राणी को मोक्ष मिलता है, सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सौभाग्य का आगमन होता हैं।स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व तारों की छाँव में माना गया है।यदि आप गंगा स्नान करने नहीं जा सकते तो आप घर में ही थोड़ा सा गंगाजल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें।
सूर्यदेव की पूजा
पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखें और इस दिन नमक का उपयोग करने से बचना चाहिए। इस दिन विशेष रूप से सूर्य की उपासना कर जल अर्घ्य दें। इससे सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन और लाल रंग के फूल डालकर ऊं सूर्याय नम: मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए।ऐसा करने से सूर्यदेव की कृपा मिलती है।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा
पौष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें और फल व खीर का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। इसके साथ ही पूर्णिमा के दिन कनकधारा स्त्रोत, श्री सूक्त और विष्णु (भगवान विष्णु मंत्र) सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी और धन का आगमन भी हो सकता है। शाम के समय जल में थोड़ा कच्चा दूध,चावल और चीनी मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से आप पर चंद्रमा की सदैव कृपा बनी रहती है।
पितरों का तर्पण करें
पौष माह में अमावस्या, संक्रांति, पूर्णिमा, एकादशी पर विशेषकर पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है व जीवन के दुःख-दर्द दूर होते है। अगर आप इस दिन पितरों का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो पौष पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण अवश्य करें। इससे पितृ प्रसन्न हो सकते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामना भी पूरी होती हैं।
दान अवश्य करें
सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए इस दिन अन्न, दूध, फल, चावल, तिल, गर्म वस्त्र और आवंले का दान करें। इस दिन ब्राह्मण, बहन और बुआ को अपनी श्रद्धा के अनुसार वस्त्र और दक्षिणा अवश्य दें।