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UNICEF India: भूखे बच्चों के लिए सहारा बनीं असम की तराली दास, इस तरह घर-घर जाकर मासूमों का भरा पेट

शिवानी अवस्थी

Shakti Yuvaon Ki Baat
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UNICEF India Assam Anganwadi Worker Tarali Das : कोविड काल में कई कोरोना वॉरियर्स लोगों के बीच उभरकर सामने आए। कुछ के नाम सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गए, तो बहुत सारे लोग कोरोना वॉरियर्स के नाम से प्रसिद्ध हो गए। इन कोरोना योद्धाओं में डॉक्टर, नर्स, पुलिस के लोग तो शामिल रहे ही, लेकिन आम साधारण लोग भी इसका हिस्सा बनें। महिलाएं भी एक योद्धा की तरह संक्रमण के इस प्रकोप के दौरान लोगों की रक्षा करते नजर आईं। भारत के उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक हर राज्य, हर शहर में इन कोरोना योद्धाओं ने अडिग रहते हुए संक्रमण से बचाव के लिए कार्य किए। इन्हीं में एक कोरोना योद्धा असम की भी हैं। उत्तर पूर्व भारत के असम में तिनसुकिया जिले की रहने वाली तराली दास की प्रयासों और उपलब्धियों के बारे में लोगों को पता होना चाहिए। आइए जानते हैं असम की तराली दास के नेक कामों के बारे में।

कौन हैं तराली दास?

कोरोना काल में जब लोग संक्रमण से बने हालातों के कारण बाहर नहीं निकल सकते थे, तब तराली दास दूसरों की सुरक्षा के लिए घर से बाहर निकलीं। तराली भली भांति जानती थीं कि उनके समुदाय के लोग भूखे हैं। अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए लोग किसी उम्मीद और मदद की आस में थे।

तराली एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और कतापुंग लाइन आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन कर रही हैं। उन्हें वर्षों का अनुभव है। इस जगह पर चाय के बागान की आबादी से सैकड़ों बच्चों और वयस्कों की सेवा होती है।

कोरोना काल में दिहाड़ी मजदूरों पर मुसीबत

लॉकडाउन के दौरान चाय बागानों में दिहाड़ी मजदूरों की स्थिति खराब होने लगी। वहीं कोविड 19 के कारण आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद हो गए। जिसके चलते सरकार की ओर से प्रतिदिन बच्चों को मिलने वाला पोषण और पोषण भी मिलना बंद हो गया।

लेकिन तराली ने ऐसे हालातों में भी 6 महीने से 3 साल तक की उम्र के 43 बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था की। तराली और उनकी टीम परिवारों तक सीधे उनके घर पहुंचीं और एक के बाद एक घर से गुजरते हुए अपने लक्ष्य को पूरा करती रहीं।इस कार्य में तराली का समर्थन आंगनवाड़ी सहायिका प्रोमिला राजपूत ने किया। खाने की व्यवस्था करने के साथ ही तराली ने लोगों को महामारी के दौरान स्वच्छता के उपायों के बारे में बताया।

केयरगिवर से बनी कोरोना योद्धा

असम की तराली कोरोना काल के दौरान एक केयरगिवर से बदलकर कोविड 19 योद्धा बन गईं। उनके साथ यूनिसेफ की भी भूमिका अहम रही। यूनिसेफ वर्ष  2010 से चाय बागानों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों की भलाई के लिए प्रयासरत है। एथिकल टी पार्टनरशिप के समर्थन में यूनिसेफ हर बच्चे के लिए जमानी कार्यक्रम चला रहा है।

 

 

 

 

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