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तस्वीरें: 110 साल पहले ऐसी मची थी तबाही, आज भी कांपते है लोग

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1905 में 4 अप्रैल की सुबह भूकंप ने ऐसी तबाही बरपाई थी कि चारों ओर सिर्फ तबाही के निशान दिख रहे थे। कांगड़ा से लेकर लाहौर तक आई इस त्रासदी में 28 हजार लोगों की जान चली गई थी। देखिए तस्वीरें..


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तस्वीरें: 110 साल पहले ऐसी मची थी तबाही, आज भी कांपते है लोग

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आज के ही दिन ठीक 110 वर्ष पहले कुदरत ने ऐसी तबाही बरपाई थी कि कांगड़ा से लेकर अमृतसर और लाहौर तक चारों और मौत की दिखाई दे रही थी। देखिए तस्वीरें..

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तस्वीरें: 110 साल पहले ऐसी मची थी तबाही, आज भी कांपते है लोग

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1905 में 4 अप्रैल की सुबह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में भूकंप ने ऐसी तबाही बरपाई थी कि चारों ओर सिर्फ तबाही के निशान दिख रहे थे। इस त्रासदी में अकेले कांगड़ा में 27 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

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इसी दिन सुबह छह बजकर 19 मिनट पर दो मिनट के लिए ऐसी हलचल हुई की लाखों परिवार बेघर हो गए और हजारों लोग इमारतों के नीचे दफन। रिएक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई थी। भूकंप के बाद कांगड़ा का ये भयावह दृश्य।

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एक आकंड़े के मुताबिक इस भूकंप में 28 हजार लोग व 53 हजार जानवरों की जान चली गई थी।

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भूकंप से मची इस तबाही के बाद मशहर पर्यटन स्‍थल धर्मशाला कुछ यूं दिखाई दे रहा था। गिरे हुए मकान और चारों तरफ पसरी तबाही देखकर हर किसी की आंखों में आंसू आ रहे थे।
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1905 में आए भूकंप से कांगड़ा के ज्यादातर ऐतिहासिक भवन नष्ट हो गए थे। सभी बाजार पूरी तरह से तबाह हो चुके थे। कांगड़ा किला, कांगड़ा मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे जबकि बैजनाथ मंदिर को आंशिक नुकसान पहुंचा था।

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भूकंप के कारण कांगड़ा किला पूरी तरह से तहस-नहस हो गया था। गिरी हुर्द दीवारे देखकर तबाही का अंदाज खुद ही लगाया जा सकता है।

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भूकंप के बाद धर्मशाला कुछ इस तरह दिखाई दे रहा था।

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भूकंप की जद में 4 लाख 16 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र भूकंप को लेकर काफी संवेदनशील है। अगर प्रकृति ने एक बार फिर तबाही बरपाई तो इस बार मरने वालों की संख्या हजारों में नहीं लाखों में होगी। बावजूद इसके सरकारी अमले भूकंप से बचाव को लेकर उदासीन ही दिखते हैं।

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कांगड़ा के सीएमएस चर्च को भी भूकंप ने पूरी तरह से तबाह कर दिया था। फोटो में भूकंप के बाद बिखरा चर्च का मलबा।
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