न्यूरो साइंस सेंटर बनने से प्रशिक्षण ले रहे मेडिकल छात्रों को भी लाभ होगा। इसमें प्रशिक्षित होने वाले जूनियर डॉक्टर संबंधित बीमारियों के मामले में पूरी तरह से पारंगत होंगे। उन्हें दूसरे विभाग के विशेषज्ञ से मशविरा नहीं लेना पड़ेगा। इस सेंटर के बनने से पीजी की सीटें भी बढ़ जाएंगी। न्यूरो के क्षेत्र में शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। इसे ध्यान में रखते हुए पीजीआई की टीम इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगी है। इसे जल्द शासन को भेजा जाएगा। वहां से मुहर लगते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।
मरीजों के साथ छात्र भी उठाएंगे लाभ
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बेहारी ने कहा कि पीजीआई में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और नेपाल के भी न्यूरोलॉजिकल मरीज आते हैं। इनमें ज्यादातर गंभीर होते हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत होती है। न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर और मूवमेंट डिस्ऑर्डर में 600 से ज्यादा बीमारियां हैं। ऐसे में इनके इलाज को एक टीम की जरूरत पड़ती है। नई दिल्ली के एम्स की तर्ज पर न्यूरो साइंस सेंटर बनने से करीब पांच राज्यों के लोगों को लाभ मिलेगा।
पीजीआई में पिछले सप्ताह पार्किंसन के मरीज में डीप ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक से सर्जरी की गई है। प्रो. बेहारी ने बताया कि पीजीआई में पहली बार पार्किंसन के मरीज में इस तकनीक का प्रयोग किया गया। इसकी सफलता में न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, रेडियोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, एनेस्थीसिया, पेन क्लीनिक का संयुक्त प्रयास था।
न्यूरो साइंस सेंटर भी ऐसा ही होता है। इसमें न्यूरो से जुड़े सभी विशेषज्ञ रहते हैं। इससे गंभीर बीमारियों का तुरंत इलाज किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को तैयार किया जा रहा है।