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नोबेल पुरस्कार विजेता रुडयार्ड किपलिंग की कविता : एक बच्चे का बाग

अमर शर्मा

Vishwa Kavya
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                                                  नोबेल पुुरस्कार विजेता रुडयार्ड किपलिंग की कविता 'एक बच्चे का बाग' एक टी.बी. से पीड़ित, मोटर-गाड़ी से खिन्न बच्चे की भावना की कल्पना है; जिसे पूरे समय बगीचे में रहना पड़ता है, क्योंकि उस वक़्त इस रोग के इलाज में अधिक से अधिक ताजा हवा की हिदायत थी। 

एक बच्चे का बाग

अभी मेरे साथ कुछ भी बुरा नहीं है
सिवा कि, वो क्या कहते हैं, टी.बी. है
और इसी कारण मुझे रहना पड़े है
पूरे-पूरे दिन यहाँ बाहर बाग में
 
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बाग हमारा बहुत बड़ा नहीं है
किनारों से कारें भी जाती ही हैं
और तीखी भोंपू की आवाज़ भी करें
जिससे कि छोटे बच्चे बहुत ही डरें
 

पर सबसे बुरा है जब वे ले जाते हैं
कार में जो गुर्राते-झटकाते हैं
खुली गाड़ियों के भयंकर पास से
बंद हो जाती है आँखें मारे डर के
 

पर जब मैं फिर यहाँ बैठा होता हूँ
क्रॉयडन के जहाज़ों को देखता हूँ
फ्रांस जा रहीं होती, गाती हुई जो
जैसे पियानो के तारों की सी धुन हो
 

जब मैं स्वस्थ-लायक हो जाऊँगा
चाहता हूँ जो, सच में कर पाऊँगा
करूँगा ना इस्तेमाल रेल-कार का
बल्कि हवाई जहाज इक रखूँगा सदा
 

उड़ता फिरूँगा इस जगह उस जगह
उस नर्स को आवाज़ से डरा दूँगा
औ' देखूँगा बादलों के ऊपर का जहाँ
और मोटर गाड़ियों पे तो थूका करूँगा

- रुडयार्ड किपलिंग, अनुवाद - तरुण त्रिपाठी
 
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