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पॉल वेरलेन की सुंदर कविता 'छत के ऊपर छाया गहन शान्त नीला अम्बर'

दीपाली अग्रवाल

Vishwa Kavya
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छत के ऊपर छाया गहन शान्त नीला अम्बर 


एक वृक्ष अपने पर्ण हिलाए 
इस छत पर

और देखते, घण्टियाँ आकाश में बजतीं धीरे-धीरे 
एक पँछी वृक्ष पर गाता
अपना दर्द बिखेरे

मेरे प्रभु ! यहाँ जीवन है शान्त सरल 
एक हल्का -सा कोलाहल 
शहर से आता चलकर

तुमने क्या किया यहाँ, विलाप नहीं रुकता 
बताओ ! तुमने क्या किया, यहाँ 
अपने यौवन का?


अनुवाद : अनिल जनविजय
साभार- कविताकोश 
7 वर्ष पहले
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