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मिक्लोश रादनोती: तुम्हारी बांहों में, मैं मौत से उबर आऊंगा...

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
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                            तुम्हारी बांहों में झूल रहा हूं मैं
        
                                                    
                            
चुपचाप
मेरी बांहों में झूल रही हो तुम
चुपचाप
तुम्हारी बांहों में मैं एक बच्चा हूं
जो चुप है
मेरी बांहों में तुम एक बच्चा हो।
मैं तुम्हें सुनता हूं
तुम मुझे अपनी बांहों में लेती हो
जब मैं डरता हूं
तो तुम्हें अपनी बांहों में लेता हूं
और मैं डरा हुआ नहीं हूं
मौत का गहरा सन्नाटा भी तुम्हारी बांहों में
मुझे डरा नहीं सकता
तुम्हारी बांहों में मैं
मौत से उबर आऊंगा
एक सपने की तरह।

- मिक्लोश रादनोती
9 वर्ष पहले
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