विज्ञापन

वायरल: अटलजी को निधि 'अर्चना' की काव्यात्मक श्रद्धांजलि...

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  जीवन और मृत्यु,
नदी के दो किनारे, 
बीच में बहती,
मोह माया की प्यास,
मिलकर होता एहसास
विज्ञापन

एक अनजान मिलन की आहट

एक अनजान मिलन की आहट,
जीवन की आपाधापी में,
बिसरे हर मोहक गीत,
नहीं की मृत्यु की प्रतीक्षा,
न की उस नितांत अजनबी से 
मिलने की आस

कितने अधूरे स्वप्न रहे

कितने अधूरे स्वप्न रहे
कितनी कविताओं में शब्द नहीं जड़े,
कितने दृश्य रंग बिना सूने रहे,
जीवन में कई कष्टों ने घेरा
हे मृत्यु ! कर लो अब आलिंगन,
मिल जाऊं तुमसे देकर अपने,
सारे स्वप्न इस धरा को,
हो जाऊं अमर मैं,
इतिहास के पन्नों पर,
नाम औक तारीख़ बनकर.....
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

DINESH PRAJAPATI

1 कविता

View Profile

KUMAR POETRY

2 कविताएं

View Profile