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सोशल मीडिया: मुझे लगा कि बारिश होगी तो बह जायेगा दुःख

रत्नेश मिश्र

Viral Kavya
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                                                  मुझे लगा कि बारिश होगी
तो बह जायेगा दुःख
पर बहा नहीं
आंखों से बिखरा
फिर हरा हुआ दुःख

मुझे लगा कि तुम आओगे
तो नहीं रहेगा दुःख
पर गया कहाँ
झांकता रहा तुम्हारे कंधों के पीछे से
संग- साथ रहा संशय की तरह
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मुझे लगा जब दिन बीतेंगे
बीत जायेगा दुःख
पर बीतते रहे दिन
रीतता रहा जीवन
और रेत की तरह चिपका रहा दुःख

मुझे लगा कि क्षण बिसरेगा
तो बिसरेगा दुःख
पर चुभा रहा स्मृतियों की देह पर
सूई की तरह
चमकती रही उसकी देह

मुझे लगा जब झरेंगे बौर
तब झरेगा दुःख
पर वह मंजरियों की गंध की तरह फैला
कोयल की तरह छुप कर बोलता रहा
जामुन की तरह जीभ से चिपका उसका गाढ़ा रंग

मुझे लगा जब आग जरेगी
तब जरेगा दुःख
उसने मुझको जीभ बिराया
अजर आत्मा की देह धरे
कहाँ जरेगा दुःख

मुझे लगा कि सब लिख दूंगा
तो लिख जायेगा दुःख
दुःख हँसा
जब चुप हूँ मैं इतना
किसको दिख जायेगा दुःख!

- Rakesh Rohit की फेसबुक वाल से साभार 
6 वर्ष पहले
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