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Social Media Shayari: एक सुकून सा मिलता है तुझे सोचने से भी

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                                                  एक सुकून सा मिलता है तुझे सोचने से भी 
फिर कैसे कह दूँ मेरा इश्क़ बेवजह सा है 
 
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बेवजह अब ज़िंदगी में प्यार के बीज ना बोये कोई 
मोहब्बत के पेड़ हमेशा ग़म की बारिश ही लाते हैं 
 

मुफ़्त में लूट लेती है दुनिया उन्हें 
जिन्हें खुद की क़ीमत का एहसास नहीं होता 
 

लोग कहते हैं की पत्थर नही रोते हैं ,
हमने पहाड़ों से दरिया निकलते देखे हैं 
 

मुझे इश्तिहार सी लगती है ये मुहब्बत की कहानियां
जो कहा नहीं वो सुना करो, जो सुना नहीं वो कहा करो 
 

जितना ही मेरा मिज़ाज है सादा 
उतने ही मुझे उलझे हुए लोग मिले 
 

रोज रोज गिर कर कितना मुकम्मल खड़ा हूँ
ज़िंदगी देख मैं तुझसे कितना बड़ा हूँ
 

कभी उम्मीदें उधड़ जाये तो, मेरे पास ले आना 
मैं हौसलों का दर्ज़ी हूँ, मुफ़्त में रफ़ू कर दूंगा 
 

पटरी से उतरते ही ख़त्म हो जाती हैं 
रेल और ज़िंदगी कितनी एक-सी हैं 
 

हम बचाते रह गए दीमक से अपना घर
कुर्सियों के चन्द कीड़े सारा मुल्क खा गए

8 महीने पहले
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