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Social Media Poetry: हम किसी के नयन में फँसे रह गये !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                            साथ  के  लोग पहुंचे कहाँ से कहाँ 
        
                                                    
                            
हम किसी के नयन में फँसे रह गये !

कुछ सफल लोग हमको बुलाते रहे
एक   ऊँचा   शिखर चूमने के लिये 
मस्तियों  ने   हजारों   इशारे   किये
साथ   में   खेलने   झूमने  के लिये

झुक न पाये कभी तो निकाले नहीं
और  काँटे  चरन  में  फँसे रह गये !

दूर  से  एक  सूरज  दिखाया  गया 
पास पँहुचे मिली इक किरन भी नहीं
उम्र भर की कमाई कहीं छिन गयी
ब्याज छोड़ो मिला मूलधन भी नहीं 

एक  विश्वास  की  डोर  थामे  हुए 
हम किसी के वचन में फँसे रह गये !

एक  कर्त्तव्य  था  तो  निभाया गया 
राजधानी  कभी  जो  छुटी,छोड़ दी 
सब  सही  था  मगर भ्रम बुलाने लगे
एक दिन फिर अकेली कुटी छोड़ दी

साधुवेशी  दशानन  उधर  छल गये 
हम इधर इक हिरन में फँसे रह गये ! 

साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

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