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Social Media Poetry: सच बताना लौट आऊँ तो क्या मुझे स्वीकार कर लोगे !

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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                                                  सच  बताना लौट आऊँ तो
क्या मुझे स्वीकार कर लोगे !

ला  न  पाऊंगा सितारे एक दिन तुमने कहा था
मैं नहीं काबिल तुम्हारे एक दिन तुमने कहा था

मैं  सितारों  को  लुटाऊँ तो
क्या मुझे स्वीकार कर लोगे !

खींच कर तुमको उजाले  दूर मुझसे जा रहे थे
तुम महल का स्वप्न पाले दूर मुझसे जा रहे थे
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वे महल तुमको दिखाऊं तो
क्या मुझे स्वाकार कर लोगे !

वह प्रतीक्षा का अभागा क्षण अभी मैला नहीं है
देह   मैली  हो   चुकी है मन अभी मैला नहीं है

आज फिर तुम को बुलाऊँ तो
क्या  मुझे  स्वीकार कर लोगे !

साभार: ज्ञान प्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से साभार 
5 महीने पहले
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