विज्ञापन

Urdu Poetry: ज़ुबैर अली ताबिश की ग़ज़ल- ज़ख़्म भरने लगे हैं पिछली मुलाक़ातों के

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैं 
सब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं 

कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझे 
आप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं 

मैं कहाँ जाऊँ करूँ किस से शिकायत उस की 
हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं 
विज्ञापन

ज़ख़्म भरने लगे हैं पिछली मुलाक़ातों के 
फिर मुलाक़ात के आसार नज़र आते हैं 

एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर 'ताबिश' 
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं 
 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

419 कविताएं

View Profile