विज्ञापन

वसी शाह: काँधों पे ग़म की शाल है और चाँद रात है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


आँखों में चुभ गईं तिरी यादों की किर्चियाँ
काँधों पे ग़म की शाल है और चाँद रात है

दिल तोड़ के ख़मोश नज़ारों का क्या मिला
शबनम का ये सवाल है और चाँद रात है

कैम्पस की नहर पर है तिरा हाथ हाथ में
मौसम भी ला-ज़वाल है और चाँद रात है

हर इक कली ने ओढ़ लिया मातमी लिबास
हर फूल पुर-मलाल है और चाँद रात है

छलका सा पड़ रहा है 'वसी' वहशतों का रंग
हर चीज़ पे ज़वाल है और चाँद रात है
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 
8 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8653 कविताएं

View Profile

SATYENDRA KUMAR

117 कविताएं

View Profile