विज्ञापन

Waseem Barelvi Poetry: मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


मैं अपने ख़्वाब से बिछड़ा नज़र नहीं आता
तो इस सदी में अकेला नज़र नहीं आता

अजब दबाओ है उन बाहरी हवाओं का


घरों का बोझ भी उठता नज़र नहीं आता

मैं तेरी राह से हटने को हट गया लेकिन


मुझे तो कोई भी रस्ता नज़र नहीं आता

मैं इक सदा पे हमेशा को घर तो छोड़ आया


मगर पुकारने वाला नज़र नहीं आता

धुआँ भरा है यहाँ तो सभी की आँखों में


किसी को घर मिरा जलता नज़र नहीं आता

ग़ज़ल-सराई का दा'वा तो सब करे हैं 'वसीम'


मगर वो 'मीर' सा लहजा नज़र नहीं आता

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all