विज्ञापन

तहज़ीब हाफ़ी: वो पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँ नहीं करता

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता
हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता

महाज़-ए-इश्क़ से कब कौन बच के निकला है
तू बच गया है तो ख़ैरात क्यूँ नहीं करता

वो जिस की छाँव में पच्चीस साल गुज़रे हैं
वो पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँ नहीं करता

मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ
वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता

मुझे तू जान से बढ़ कर अज़ीज़ हो गया है
तो मेरे साथ कोई हाथ क्यूँ नहीं करता 
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। 
8 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Powari Bhasha

333 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile