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Urdu Poetry:  करता है मुझ से रोज़ तू तकरार शुक्रिया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            करता है मुझ से रोज़ तू तकरार शुक्रिया
        
                                                    
                            
इस में महक रहा है तिरा प्यार शुक्रिया

जैसे लुटा रहा है वो मुझ पर मोहब्बतें
करती हूँ दिल से उस का मैं सौ बार शुक्रिया

उस की मोहब्बतों पे लुटा दूँ ये ज़िंदगी
जिस ने दिया है मुझ को ये संसार शुक्रिया

हाज़िर है मेरी जान भी मुर्शिद तिरे लिए
तू ने किए हैं स्वप्न ये साकार शुक्रिया

मुझ को तो शा'इरी का नहीं था कोई शु'ऊर
अब पा लिया मक़ाम ये सरकार शुक्रिया

~ श्रुति छाया

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