विज्ञापन

Urdu Ghazal: साहिर लुधियानवी की ग़ज़ल 'तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले


अपने पे भरोसा है तो इक दाव लगा ले

डरता है ज़माने की निगाहों से भला क्यों
इंसाफ़ तिरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले

क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो
ख़ुद मिट के किसी और को मिटने से बचा ले

टूटे हुए पतवार हैं कश्ती के तो हम क्या
हारी हुई बाहों को ही पतवार बना दे

3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

Vijay BindaasRaja

192 कविताएं

View Profile