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साहिर लुधियानवी: वक़्त से दिन और रात वक़्त से कल और आज

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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वक़्त से दिन और रात वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शय ग़ुलाम वक़्त का हर शय पे राज

वक़्त की पाबंद हैं आती जाती रौनक़ें
वक़्त है फूलों की सेज वक़्त है काँटों का ताज

आदमी को चाहिए वक़्त से डर कर रहे
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23 घंटे पहले
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