सच्चाई और ईमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन यही रिश्तों में भरोसा पैदा करता है। मामला चाहे इश्क़ का हो या आपसी रिश्तों का, किसी न किसी रूप में झूठ हर जगह पसरा हुआ है। झूठ से भरोसा टूटता है और लोग परेशान होते हैं, बिखरते हैं, टूट जाते हैं। लेकिन जब कोई रचनाकार/कवि या शायर इस तरह की परिस्थिति को झेलता तो वह अपने जज़्बातों को कविता या शायरी में ढालता है। शेरो-शायरी की श्रृंखला में आज पेश है ‘झूठ’ पर मशहूर शायरों के कुछ शेर-
झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
- शारिक़ कैफ़ी
वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से
मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
- वसीम बरेलवी
झूट के आगे पीछे दरिया चलते हैं
सच बोला तो प्यासा मारा जाएगा
- वसीम बरेलवी
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मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
- सचिन शालिनी
झूठे चेहरों को सच्चा बताता सदा
रखता इंसाँ सी फ़ितरत अगर आइना
- सचिन शालिनी
झूटा है झूट बात ये बोलेगा आईना
आओ हमारे सामने हम सच बताएँगे
- जुनैद अख़्तर
जा के घर झूटों न पूछी बात तक
बस तिरी झूटी मोहब्बत देख ली
- रिन्द लखनवी
झूट कहने लगा सच से बचने लगा
हौसले मिट गए तजरबा रह गया
- हिलाल फ़रीद
झूट बोला है तो क़ायम भी रहो उस पर 'ज़फ़र'
आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए
-ज़फ़र इक़बाल
झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया
-वसीम बरेलवी
जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता
- डाॅ बशीर बद्र
झूठ से, सच से जिससे भी यारी रख़ें
आप अपनी तक़रीर जारी रख़ें
- राहत इंदौरी
मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
- सचिन शालिनी
मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
-परवीन शाकिर
सादिक़ हूँ अपने क़ौल का 'ग़ालिब' ख़ुदा गवाह
कहता हूँ सच कि झूट की आदत नहीं मुझे
-मिर्ज़ा ग़ालिब
तेरे हर झूठ को सच मान लेते हैं हमेशा हम
हमें भी रस्म-ए-उल्फ़त को निभाना ख़ूब आता है
-चाँदनी पांडे