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Urdu Ghazal: परवीन शाकिर की ग़ज़ल 'हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया'

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
उस ने भी भूल जाने का वा'दा नहीं किया

दुख ओढ़ते नहीं कभी बज़्म-ए-तरब में हम
मल्बूस-ए-दिल को तन का लबादा नहीं किया

जो ग़म मिला है बोझ उठाया है उस का ख़ुद
सर ज़ेर-ए-बार-ए-साग़र-ओ-बादा नहीं किया

कार-ए-जहाँ हमें भी बहुत थे सफ़र की शाम
उस ने भी इल्तिफ़ात ज़ियादा नहीं किया

आमद पे तेरी इत्र ओ चराग़ ओ सुबू न हों
इतना भी बूद-ओ-बाश को सादा नहीं किया 

2 वर्ष पहले
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Milan Thakur

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