विज्ञापन

Parveen Shakir Poetry: सारी रात सोते में मुस्कुरा रहा था वो

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  धूप सात रंगों में फैलती है आँखों पर 
बर्फ़ जब पिघलती है उस की नर्म पलकों पर 

फिर बहार के साथी आ गए ठिकानों पर 
सुर्ख़ सुर्ख़ घर निकले सब्ज़ सब्ज़ शाख़ों पर 

जिस्म ओ जाँ से उतरेगी गर्द पिछले मौसम की 
धो रही हैं सब चिड़ियाँ अपने पंख चश्मों पर 

सारी रात सोते में मुस्कुरा रहा था वो 
जैसे कोई सपना सा काँपता था होंटों पर 
विज्ञापन

तितलियाँ पकड़ने में दूर तक निकल जाना 
कितना अच्छा लगता है फूल जैसे बच्चों पर 

लहर लहर किरनों को छेड़ कर गुज़रती है 
चाँदनी उतरती है जब शरीर झरनों पर 

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Milan Thakur

5 कविताएं

View Profile