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Urdu Poetry: मुस्तैद है सरकार ये कह कर चले गए

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            हम सब हैं  शर्मसार  ये कह कर चले गए 
        
                                                    
                            
मुस्तैद  है   सरकार  ये  कह कर चले गए 

जितने  थे   चश्मदीद  वो   मुकरे  बयान  से 
झूठे हैं सब अखबार ये  कह  कर चले गए 

होती  रही  है  द्रोपदी  सदियों से निर्वसन 
खामोश   कर्णधार  ये  कह  कर  चले  गए 

जिन  पर  टिकी  हुई थी ये संसद की आबरू 
संसद  है अभी यार ये  कह कर चले गए 

बख्शे न  जाएंगे  कभी  जो  होंगे गुनहगार 
झेलो भी अब हुंकार  ये  कह  कर चले गए 

है व्यर्थ सियासत यह सरकार के खिलाफ 
सत्ता  के   चाटुकार  ये   कह  कर चले गए 

कलयुग  है  इसमें  होते  रहेंगे ये  जरायम
बन कर के  भाष्यकार  ये कहकर चले गए 

`ये  आगजनी, कत्ल, ये अखबार-बाजियां--
यह  सब  है  दुष्प्रचार ये कह कर चले गए.

बच्चों  औ  नौनिहालों  पे चलवा के लाठियाँ 
'अब चिल भी करो यार',ये कह कर चले गए

लोगों  के  मनोबल  को  बूटों  से  कुचल  के
सब  हैं   गुनाहगार   ये   कह  कर  चले गए 

मुश्किल न था कि आ के पूछ लेते हाल 'ओम'
सत्ता  से   डरो   यार  ये   कह  कर  चले गए 

~ ओम निश्चल

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