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निदा फ़ाज़ली: कोई किसी से ख़ुश हो और वो भी बारहा हो ये बात तो ग़लत है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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कोई किसी से ख़ुश हो और वो भी बारहा हो ये बात तो ग़लत है
रिश्ता लिबास बन कर मैला नहीं हुआ हो ये बात तो ग़लत है

वो चाँद रहगुज़र का साथी जो था सफ़र था मो'जिज़ा नज़र का
हर बार की नज़र से रौशन वो मो'जिज़ा हो ये बात तो ग़लत है

है बात उस की अच्छी लगती है दिल को सच्ची फिर भी है थोड़ी कच्ची
जो उस का हादिसा है मेरा भी तजरबा हो ये बात तो ग़लत है

दरिया है बहता पानी हर मौज है रवानी रुकती नहीं कहानी
जितना लिखा गया है इतना ही वाक़िआ हो ये बात तो ग़लत है

ये युग है कारोबारी हर शय है इश्तिहारी राजा हो या भिकारी
शोहरत है जिस की जितनी इतना ही मर्तबा हो ये बात तो ग़लत है
 
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11 महीने पहले
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