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नासिर काज़मी: मैं ने जब लिखना सीखा था, पहले तेरा नाम लिखा था

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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मैं ने जब लिखना सीखा था
पहले तेरा नाम लिखा था

मैं वो सब्र-ए-समीम हूँ जिस ने
बार-ए-अमानत सर पे लिया था

मैं वो इस्म-ए-अज़ीम हूँ जिस को
जिन्न-ओ-मलक ने सज्दा किया था

तू ने क्यूँ मिरा हाथ न पकड़ा
मैं जब रस्ते से भटका था

जो पाया है वो तेरा है
जो खोया वो भी तेरा था

तुझ बिन सारी उम्र गुज़ारी
लोग कहेंगे तू मेरा था

पहली बारिश भेजने वाले
मैं तिरे दर्शन का प्यासा था
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5 महीने पहले
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