विज्ञापन

मुस्तफ़ा ज़ैदी की ग़ज़ल: तेरे चेहरे की तरह और मिरे सीने की तरह

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            तेरे चेहरे की तरह और मिरे सीने की तरह 
        
                                                    
                            
मेरा हर शेर दमकता है नगीने की तरह 

फूल जागे हैं कहीं तेरे बदन की मानिंद 
ओस महकी है कहीं तेरे पसीने की तरह 

ऐ मुझे छोड़ के तूफ़ान में जाने वाली 
दोस्त होता है तलातुम में सफ़ीने की तरह 

ऐ मिरे ग़म को ज़माने से बताने वाली 
मैं तिरा राज़ छुपाता हूँ दफ़ीने की तरह 

तेरा वादा था कि इस माह ज़रूर आएगी 
अब तो हर रोज़ गुज़रता है महीने की तरह 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pandit Chandradutt

2866 कविताएं

View Profile